राम मंदिर पर भगवा ध्वज: कांग्रेस का PM मोदी पर तीखा हमला, पूछा- 'क्या मस्जिद और चर्च पर भी फहराएंगे झंडा?'
मंगलवार की सुबह अयोध्या में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। जहां सरकार इसे भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान का क्षण बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार आस्था का राजनीतिकरण कर रही है।
कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल: ‘नेहरू से सीखें धर्मनिरपेक्षता’
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस आयोजन के प्रतीकवाद (symbolism) पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत भारत का कोई ‘राजधर्म’ नहीं है।
अल्वी ने तीखा हमला बोलते हुए पूछा, “प्रधानमंत्री ने मंदिर पर ही झंडा क्यों फहराया? क्या वह किसी मस्जिद, गुरुद्वारे या चर्च पर झंडा फहराएंगे?” उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी यह सब यूपी चुनावों और राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं ताकि देश में धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा सके। अल्वी ने नसीहत देते हुए कहा, “उन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू से धर्मनिरपेक्षता सीखनी चाहिए।”
धर्म के नाम पर हो रही मार्केटिंग'
सिर्फ अल्वी ही नहीं, अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी मोर्चा खोला:
सांसद इमरान मसूद ने कहा कि आस्था एक निजी मामला है जिसे संविधान का संरक्षण प्राप्त है। इसे मानने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसका प्रदर्शन अलग बात है।
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सिर्फ “धर्म के नाम पर मार्केटिंग” है। उन्होंने तर्क दिया कि प्राण प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण हमेशा एक साथ होते हैं। इनके लिए अलग-अलग समारोह आयोजित करना साफ तौर पर विज्ञापन की कोशिश है।
फैजाबाद का चुनावी गणित
यहाँ यह याद दिलाना जरूरी है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में, अयोध्या (फैजाबाद सीट) ने सबको चौंका दिया था। राम मंदिर के उद्घाटन के बावजूद, वहां सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को हरा दिया था।
सभ्यता की वापसी का प्रतीक: पीएम मोदी
विपक्ष की आलोचनाओं के बीच, पीएम मोदी और मोहन भागवत ने मंदिर पर ध्वज फहराया। मंदिर का मुख्य शिखर पारंपरिक उत्तर भारतीय ‘नागर’ शैली में बना है, जबकि इसके चारों ओर 800 मीटर का परकोटा दक्षिण भारतीय शैली में है, जो वास्तुकला की विविधता को दर्शाता है।
ध्वजारोहण से पहले मोदी और भागवत ने आरती और पूजा भी की।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा:
“आज सदियों पुराने जख्मों और पीड़ा को मरहम मिला है।”
उन्होंने इस धार्मिक ध्वज को भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। पीएम ने ध्वज के भगवा रंग, उस पर अंकित सूर्यवंश, ओम और कोविदार वृक्ष के चित्रों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने ‘कर्म प्रधान विश्व रचि राखा’ का संदेश देते हुए कहा कि यह धर्मध्वज आने वाली पीढ़ियों को अपने वचन पर अडिग रहने की प्रेरणा देगा।
गुलामी की मानसिकता छोड़नी होगी'
पीएम मोदी ने भक्तों से अयोध्या में ‘सप्त मंडपम’ देखने की अपील की और कहा कि राम भावनाओं से जोड़ते हैं, तोड़ते नहीं। उन्होंने कहा, “राम के लिए भक्ति मायने रखती है, वंश नहीं।”
पीएम ने देश को गुलामी की मानसिकता से आजाद होने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा:
“हमने यह मान लिया था कि जो विदेशी है वही श्रेष्ठ है और हमारा सब कुछ हीन है।”
“कहा जाता था कि हमारा संविधान विदेशी संविधानों से प्रेरित है, लेकिन सच यह है कि भारत लोकतंत्र की जननी है। लोकतंत्र हमारे डीएनए में है।“
500 साल का संघर्ष हुआ सफल
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर के पूरा होने से सारे प्रयास सार्थक हो गए हैं और अब ‘राम राज्य’ का ध्वज फहरा दिया गया है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “500 साल बाद हिंदू समाज ने अपना सत्य स्थापित किया है। जिन लोगों ने इसके लिए अपना बलिदान दिया, आज उनकी आत्माओं को शांति मिली होगी।”