Venezuelan के सत्ता से बेदखल किए गए नेता निकोलस मादुरो ने America की अदालत में एक ऐसा पैंतरा चला है, जिसने ट्रंप प्रशासन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। मादुरो का कहना है कि वे अब भी Venezuelan के राष्ट्रपति हैं, और एक राष्ट्राध्यक्ष (Head of State) होने के नाते उन्हें America में मुकदमे से पूरी तरह छूट यानी ‘इम्युनिटी’ मिलनी चाहिए।
हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस दलील को खारिज करने की पूरी तैयारी में है, लेकिन Venezuelan को लेकर उनकी अपनी ही बदलती नीतियों के कारण यह केस कमजोर पड़ता दिख रहा है।
क्या है मादुरो की दलील? निकोलस मादुरो का तर्क सीधा है—अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी भी देश के मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष पर दूसरे देश की अदालतों में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह नियम America और पूरी दुनिया में लंबे समय से माना जाता रहा है।
इसका एक ताज़ा उदाहरण 2022 का है, जब America ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का केस यह कहकर खारिज कर दिया था कि उन्हें ‘हेड-ऑफ-स्टेट इम्युनिटी’ हासिल है।
लेकिन मादुरो का मामला थोड़ा पेचीदा है। America सरकार सालों से यह मानती आ रही है कि मादुरो ने अवैध रूप से सत्ता पर कब्जा जमाया हुआ था। 2024 में जो बाइडेन प्रशासन ने साफ कहा था कि Venezuelan के चुनाव विपक्ष के उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज ने जीते थे, लेकिन मादुरो ने धांधली करके खुद को विजेता घोषित कर दिया। ट्रंप प्रशासन भी इसी बात पर कायम है।
ट्रंप की इस चाल से फंस सकता है पेंच कहानी में नया मोड़ तब आया जब मादुरो के पकड़े जाने के बाद Venezuelan की कमान उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने संभाली। ट्रंप प्रशासन ने रोड्रिगेज के साथ बातचीत शुरू कर दी है, और यही बात अब America के खिलाफ जा सकती है।
सोमवार को अदालत में अपनी पहली पेशी के दौरान मादुरो ने जज से साफ कहा, “मैं एक संप्रभु राष्ट्र का प्रमुख हूं और मुझे वो सभी विशेषाधिकार मिलने चाहिए जो एक राष्ट्रपति को मिलते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें काराकस से America लाना कोई गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक “सैन्य अपहरण” (Military Abduction) है।
अब समस्या यह है कि America ने डेल्सी रोड्रिगेज को Venezuelan के अंतरिम नेता के तौर पर स्वीकार कर लिया है, जो पहले मादुरो की डिप्टी थीं। कानूनी जानकारों का कहना है कि रोड्रिगेज को मान्यता देने का मतलब है कि America ने परोक्ष रूप से मादुरो की सरकार को भी मान्यता दे दी है।
पनामा के तानाशाह का उदाहरण America सरकार अपनी तरफ से यह दलील देगी कि उसने 2019 के बाद से कभी भी मादुरो को राष्ट्रपति माना ही नहीं। वे पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिएगा के केस का हवाला दे सकते हैं।
1989 में जब America ने पनामा पर हमला कर नोरिएगा को पकड़ा था, तो नोरिएगा ने भी इम्युनिटी की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया था कि America ने उन्हें कभी पनामा का नेता माना ही नहीं था। ट्रंप की टीम भी मादुरो के खिलाफ यही तर्क इस्तेमाल करने वाली है।
फेडरल प्रॉसिक्यूटर रिचर्ड ग्रेगरी, जिन्होंने नोरिएगा के खिलाफ केस लड़ा था, कहते हैं, “हम किसे राष्ट्राध्यक्ष मानते हैं, यह सरकार का फैसला है। America ने 2019 से मादुरो को मान्यता नहीं दी है, इसलिए मुझे नहीं लगता कि मादुरो की दलील काम करेगी।”
लेकिन केस में एक बड़ा ‘लूपहोल’ है भले ही America मादुरो को राष्ट्रपति न माने, लेकिन डेल्सी रोड्रिगेज के साथ उनका जुड़ाव मादुरो के पक्ष को मजबूत कर रहा है। अगर रोड्रिगेज वैध नेता हैं (जैसा कि America उनसे बात करके संकेत दे रहा है), तो मादुरो भी वैध हुए, क्योंकि रोड्रिगेज को सत्ता मादुरो से ही मिली है। और तो और, रोड्रिगेज खुद कह रही हैं कि मादुरो ही असली राष्ट्रपति हैं और वो सिर्फ उनकी गैरमौजूदगी में काम संभाल रही हैं।
‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, America न्याय विभाग (DOJ) के अधिकारी भी इस बात से चिंतित हैं। उन्हें डर है कि मादुरो यह साबित कर सकते हैं कि रोड्रिगेज के साथ अमेरिका की बातचीत का मतलब उनकी सरकार को मान्यता देना है।
कानूनी विशेषज्ञों की चेतावनी है कि ‘इम्युनिटी’ का मामला नैतिकता से ज्यादा तकनीकी मान्यता पर टिका होता है। अगर इसमें थोड़ी सी भी अस्पष्टता रही, तो मादुरो इसका फायदा उठाकर कार्यवाही को लंबा खींच सकते हैं।
फिलहाल, न्याय विभाग के अंदर खलबली है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक ट्रंप की टीम सार्वजनिक रूप से रोड्रिगेज की वैधता को खारिज नहीं करती, मादुरो इसका फायदा उठाते रहेंगे। वहीं, अदालतें अक्सर ऐसे मामलों में सरकार की राय मानती हैं, लेकिन वे स्वतंत्र फैसला लेने के लिए भी आजाद हैं।