जमीन खोदते ही चमक उठी आंखें! घड़े में भरा था 60 लाख का Cold, सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग

Karnataka

Karnataka : Karnataka के ऐतिहासिक गांव लक्कुंडी में घर बनाने के लिए हो रही एक साधारण सी खुदाई तब खजाने की खोज में बदल गई, जब एक स्कूली छात्र के हाथ जैकपॉट लग गया। घर की नींव खोदते समय लड़के को सोने के गहने मिले, जिनकी कीमत 60 से 70 लाख रुपये बताई जा रही है। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने साफ किया है कि यह खोज किसी ऐतिहासिक ‘खजाने’ की श्रेणी में नहीं आती।

तांबे के बर्तन में छिपा था सोना यह मामला गदग जिले के लक्कुंडी गांव का है, जो अपने प्राचीन मंदिरों और वास्तुकला के लिए मशहूर है। यहां एक परिवार अपने घर को बड़ा करने के लिए खुदाई करवा रहा था। तभी जमीन के नीचे दबा एक तांबे का बर्तन (घड़ा) मिला। जब उसे खोला गया, तो अंदर सोने के ढेर सारे गहने देखकर परिवार और मजदूरों की आंखें फटी की फटी रह गईं।

8वीं के छात्र ने दिखाई ईमानदारी पुलिस के मुताबिक, 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र की नजर सबसे पहले उस तांबे के बर्तन और उसके अंदर रखे गहनों पर पड़ी। लड़के ने गजब की ईमानदारी दिखाई और इस बात को छिपाने के बजाय तुरंत गांव के बुजुर्गों को इसके बारे में बताया। गांव के बड़ों ने भी समझदारी दिखाते हुए प्रशासन और पुलिस को सूचित कर दिया ताकि कानूनी कार्रवाई हो सके।

पुलिस ने कब्जे में लिया 470 ग्राम सोना गदग के एसपी रोहन जगदीश ने बताया कि सोने को नियमानुसार कब्जे में ले लिया गया है। उन्होंने कहा, “लड़के ने ईमानदारी से गांव के वरिष्ठ सदस्यों को बताया। खबर मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे। घड़े में 22 अलग-अलग तरह के जेवर थे।”

शुरुआती जांच में पता चला है कि सोने का कुल वजन करीब 470 ग्राम है। इसमें हार, चूड़ियां, बालियां और अन्य आभूषण शामिल हैं। आज के बाजार भाव के हिसाब से इनकी कीमत 60 लाख से 70 लाख रुपये के बीच आकी गई है।

ASI ने कहा- यह पूर्वजों की जमापूंजी है, खजाना नहीं सोना मिलने के अगले ही दिन ASI (धारवाड़ सर्कल) के अधीक्षण पुरातत्वविद् रमेश मुलिमानी ने मौके का मुआयना किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाखों की कीमत होने के बावजूद इसे पुरातात्विक नियमों के तहत ‘खजाना’ नहीं माना जा सकता।

इसकी वजह बताते हुए मुलिमानी ने कहा कि कई गहने टूटी-फूटी हालत में हैं और जिस जगह (रसोई जैसा हिस्सा) से ये मिले हैं, वह एक पुरानी प्रथा की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, “पुराने जमाने में लोगों के पास बैंक लॉकर या तिजोरी नहीं होती थी, इसलिए वे अक्सर अपने जेवर रसोई के चूल्हे के पास जमीन में गाड़कर छिपा देते थे।”

जांच के लिए भेजा गया सोना ASI अधिकारी ने बताया कि गहनों की सही उम्र का पता लगाने के लिए अभी और जांच की जरूरत है। अगर वहां कोई सिक्का मिलता तो यह बताना आसान होता कि ये किस काल के हैं। फिलहाल, सुरक्षा को देखते हुए सोने को कंस्ट्रक्शन साइट से हटाकर सरकारी खजाने (Treasury) में जमा करा दिया गया है।

भले ही अधिकारी इसे तकनीकी रूप से खजाना न मानें, लेकिन लक्कुंडी गांव के लोगों के लिए यह घटना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। लड़के की ईमानदारी और अचानक मिले इस धन ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।