भारत में सड़कों की तस्वीर बहुत तेजी से बदल रही है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और प्रदूषण की चिंता के बीच अब भारतीय सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ (EVs) सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन चुकी हैं। आने वाला दशक यह तय करेगा कि हम कैसे सफर करेंगे, जहाँ पर्यावरण की सुरक्षा ही सबसे ऊपर होगी।
सरकारी योजनाओं का मिला जबरदस्त 'पावर डोज़'
भारत सरकार देश को ‘ग्रीन’ बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। FAME जैसी बड़ी स्कीम, राज्यों की अपनी EV पॉलिसी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर मात्र 5% GST (जबकि पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर 28% है) ने इस सेक्टर में जान फूक दी है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य तो सब्सिडी के साथ-साथ रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में भी भारी छूट दे रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 2070 तक ‘नेट-जीरो’ उत्सर्जन हासिल करना है, जिसमें इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ सबसे बड़ा रोल निभाएंगी।
हर तरफ दिख रहा है इलेक्ट्रिक का जलवा
फिलहाल भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (स्कूटर और बाइक) का बोलबाला है, लेकिन अब कारें भी पीछे नहीं हैं। Tata Nexon EV, Tiago EV, MG Comet और Mahindra XUV400 जैसी गाड़ियों ने आम लोगों के लिए इलेक्ट्रिक कार के सपने को सच कर दिया है। यही नहीं, शहरों में अब इलेक्ट्रिक बसें और ई-रिक्शा भी खूब दिख रहे हैं, जिससे न केवल प्रदूषण कम हो रहा है, बल्कि ड्राइवरों की जेब भी कम ढीली हो रही है।
चार्जिंग की टेंशन होगी खत्म!
इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने वालों के मन में सबसे बड़ा डर होता है— ‘रास्ते में बैटरी खत्म हो गई तो क्या होगा?’ इसे ‘रेंज एंग्जायटी’ कहते हैं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। हाईवे, मॉल, ऑफिस और सोसायटियों में चार्जिंग पॉइंट लग रहे हैं। आने वाले समय में बैटरी स्वैपिंग (बैटरी बदलना) और अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग जैसी तकनीक इस समस्या को जड़ से खत्म कर देगी।
मेक इन इंडिया' से घटेंगे दाम
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भारत अब बैटरी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। सरकार की PLI स्कीम के तहत अब भारत में ही एडवांस बैटरी बनाने की तैयारी है। जब बैटरी भारत में बनेगी, तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी। साथ ही, सोडियम-आयन जैसी नई तकनीकों पर भी रिसर्च चल रही है जो लिथियम से भी सस्ती और सुरक्षित हो सकती हैं।
सिर्फ EV नहीं, हाइड्रोजन और एथेनॉल भी है तैयार
ग्रीन मोबिलिटी का मतलब सिर्फ इलेक्ट्रिक कारें नहीं हैं। भारत अब ग्रीन हाइड्रोजन, एथेनॉल ब्लेंडिंग और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन पर भी काम कर रहा है। भारी ट्रकों और लंबी दूरी के सफर के लिए हाइड्रोजन एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
क्या है भविष्य का संकेत?
भारतीय ग्राहकों का मूड अब बदल रहा है। लोग अब समझने लगे हैं कि इलेक्ट्रिक गाड़ी चलाने का खर्च पेट्रोल के मुकाबले बहुत कम है। जानकारों का मानना है कि 2030 तक भारत में बिकने वाली ज्यादातर नई गाड़ियाँ इलेक्ट्रिक होंगी।