सावधान! क्या सरकार रिकॉर्ड कर रही है आपकी WhatsApp Call? जानिए वायरल 'नए नियमों' का पूरा सच
नई दिल्ली:
क्या आपके पास भी Whatsapp पर ऐसा कोई मैसेज आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार अब आपकी हर कॉल सुन रही है और सोशल मीडिया पर निगरानी रख रही है? अगर हां, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आजकल सोशल मीडिया पर एक मैसेज आग की तरह फैल रहा है, जिसने लोगों की नींद उड़ा रखी है। इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ने Whatsapp और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए और सख्त नियम जारी कर दिए हैं।
मैसेज में लोगों को डराया जा रहा है कि अब सरकार आपकी कॉल रिकॉर्ड करेगी, आपकी हर चैट पर नजर रखेगी और अगर आपने कुछ भी आपत्तिजनक शेयर किया, तो बिना वारंट के पुलिस आपको उठा ले जाएगी। लेकिन ठहरिए! इस वायरल दावे की हकीकत कुछ और ही है।
सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी PIB Fact Check ने इस वायरल मैसेज का ‘पोस्टमार्टम’ किया है और इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। पीआईबी ने साफ कर दिया है कि सरकार ने Whatsapp या किसी भी सोशल मीडिया ऐप की जासूसी करने के लिए कोई नया फरमान जारी नहीं किया है।
वायरल मैसेज में क्या डरावने दावे किए जा रहे हैं? Whatsapp पर घूम रहे इस फर्जी मैसेज में कई ऐसी बातें लिखी हैं, जो किसी को भी डराने के लिए काफी हैं:
दावा है कि सरकार अब सभी Whatsapp कॉल्स की रिकॉर्डिंग करेगी।
Whatsapp, Facebook, Twitter (X) और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सरकार सीधी नजर रखेगी।
कहा जा रहा है कि आपका मोबाइल फोन सीधे सरकारी मंत्रालयों के सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा।
राजनीति या धर्म पर कोई भी ‘विवादित’ पोस्ट या मैसेज भेजने पर इसे अपराध माना जाएगा।
पुलिस बिना किसी वारंट के आपको गिरफ्तार कर सकती है।
ग्रुप एडमिन के साथ-साथ ग्रुप के बाकी मेंबर्स पर भी गाज गिर सकती है।
मैसेज के आखिर में लोगों से अपील की जा रही है कि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम कर दें और अपने जानने वालों को भी सावधान करें।
PIB Fact Check ने खोली पोल इस डर के माहौल के बीच पीआईबी (PIB) ने राहत की खबर दी है। पीआईबी फैक्ट चेक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह मैसेज पूरी तरह से निराधार, झूठा और भ्रामक है। सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश, नोटिफिकेशन या गाइडलाइन जारी नहीं हुई है, जिसमें कॉल रिकॉर्डिंग या सोशल मीडिया अकाउंट्स की जासूसी की बात हो।
पीआईबी ने लोगों को आगाह किया है कि वे आंख मूंदकर ऐसे मैसेजेस पर भरोसा न करें और बिना सच्चाई जाने इन्हें आगे फॉरवर्ड करने से बचें। ये अफवाहें सिर्फ समाज में डर और भ्रम फैलाने के लिए तैयार की जाती हैं।
क्यों फैलती हैं ऐसी अफवाहें? एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिजिटल दुनिया में फेक न्यूज का वायरस बहुत तेजी से फैलता है। जब किसी मैसेज में “सरकार”, “पुलिस”, “गिरफ्तारी” या “कड़ी कार्रवाई” जैसे भारी-भरकम शब्द होते हैं, तो लोग डर जाते हैं। इसी डर की वजह से वे बिना सोचे-समझे मैसेज को अपने दोस्तों और परिवार को फॉरवर्ड कर देते हैं, जिससे झूठ को पंख लग जाते हैं।
कैसे पहचानें क्या है सच और क्या झूठ?
किसी भी वायरल खबर की पुष्टि हमेशा PIB Fact Check, सरकारी वेबसाइट्स या भरोसेमंद न्यूज चैनल्स से करें।
अगर मैसेज में कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन नंबर, तारीख या सरकारी लिंक नहीं है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है।
डर या हड़बड़ी पैदा करने वाले मैसेज अक्सर फर्जी होते हैं।
अगर आपको किसी मैसेज पर शक हो, तो उसे डिलीट कर दें, फॉरवर्ड बिल्कुल न करें।