Epstein Files में PM मोदी का नाम? विदेश मंत्रालय ने किया खंडन, कांग्रेस ने पूछे तीखे सवाल

Epstein Files विवाद में PM Modi को लेकर कांग्रेस के आरोप, विदेश मंत्रालय का बयान

‘Epstein Files’ को लेकर सामने आए एक ईमेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुख्यात अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की मुलाकात के दावों पर भारत सरकार ने साफ इनकार किया है। विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि एपस्टीन से जुड़े ईमेल में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी इसराइल यात्रा को लेकर किए गए दावे पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जुलाई 2017 में पीएम मोदी की इसराइल की आधिकारिक यात्रा के अलावा ईमेल में लिखी गई बाकी बातें “एक दोषी अपराधी की बेकार की बकवास” हैं।

शनिवार को कांग्रेस ने दावा किया था कि अमेरिका के यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सामने आया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है। पीएम मोदी हमारे तीन सवालों का सामने आकर जवाब दें।”

विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “हमें तथाकथित एपस्टीन फाइल्स से जुड़े एक ईमेल मैसेज की रिपोर्ट मिली है, जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी इसराइल यात्रा का जिक्र है। जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इसराइल की आधिकारिक यात्रा के अलावा ईमेल में बाकी बातें पूरी तरह निराधार हैं और इन्हें नजरअंदाज किया जाना चाहिए।”

कांग्रेस का क्या है दावा?

कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि Epstein Files में नरेंद्र मोदी का नाम आया है। पार्टी का दावा है कि जेफ्री एपस्टीन ने 9 जुलाई 2017 को एक ईमेल में लिखा था कि भारतीय प्रधानमंत्री ने उनसे सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए इसराइल में “नाचे और गाए” और यह कामयाब रहा।

कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 के बीच इसराइल दौरे पर थे और इससे कुछ दिन पहले 25-26 जून 2017 को अमेरिका में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे। पार्टी ने इन घटनाओं को जोड़ते हुए आरोप लगाया कि मोदी ने अमेरिका यात्रा के दौरान एपस्टीन से सलाह ली और बाद में इसराइल गए।

कांग्रेस ने दावा किया, “अब साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी का जेफ्री एपस्टीन से बहुत पुराना और गहरा नाता है, जो भारत के लिए शर्मनाक है। यह मामला राष्ट्रीय गरिमा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा है।”

कांग्रेस ने तीन सवाल उठाए—

  1. नरेंद्र मोदी जेफ्री एपस्टीन से कैसी सलाह ले रहे थे?

  2. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के किस फायदे के लिए इसराइल में ‘नाचना-गाना’ किया गया?

  3. एपस्टीन के ईमेल में लिखे ‘इट वर्क्ड’ का क्या मतलब है?

Epstein Files में और क्या?

अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी लाखों नई फाइलें सार्वजनिक की हैं। इनमें करीब 30 लाख पेज, 1.80 लाख तस्वीरें और 2,000 वीडियो शामिल हैं। ये फाइलें उस डेडलाइन के छह हफ्ते बाद जारी की गईं, जिस पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में कानून पर हस्ताक्षर हुए थे। कानून के तहत एपस्टीन से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करना जरूरी था।

इन फाइलों में एपस्टीन के जेल में बिताए समय, उनकी मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट और जेल में हुई मौत से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। साथ ही, कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों के साथ उनके ईमेल संवाद भी सामने आए हैं।

दस्तावेजों में डोनाल्ड ट्रंप का नाम सैकड़ों बार आया है। ट्रंप ने माना है कि उनकी एपस्टीन से दोस्ती थी, लेकिन उनका कहना है कि यह रिश्ता सालों पहले खत्म हो गया था और उन्हें एपस्टीन के अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी।

इन फाइलों में टेक अरबपति एलन मस्क और एपस्टीन के बीच ईमेल बातचीत का भी जिक्र है। हालांकि मस्क पर किसी तरह के गलत काम का आरोप नहीं है। मस्क पहले कह चुके हैं कि एपस्टीन ने उन्हें अपने आइलैंड पर बुलाया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था।

डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि यह अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से एक बड़े डॉक्यूमेंट रिव्यू प्रोसेस का अंत है और विभाग के स्तर पर अब काम पूरा हो चुका है। हालांकि डेमोक्रेट्स का आरोप है कि बिना ठोस वजह के करीब 25 लाख दस्तावेज अब भी रोके गए हैं।

फिलहाल, एपस्टीन फाइल्स को लेकर सियासी घमासान तेज है और इस विवाद के आगे और बढ़ने के आसार बने हुए हैं।