SIR Electoral Roll: बिहार में 47 लाख वोटरों की छुट्टी! चुनाव आयोग का यह नया चक्रव्यूह क्या है? पूरी रिपोर्ट।

SIR Electoral Roll: बिहार में 47 लाख वोटरों की छुट्टी! चुनाव आयोग का यह नया चक्रव्यूह क्या है? पूरी रिपोर्ट।

बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़ी उथल-पुथल! 47 लाख नाम कटे, जानिए क्या है SIR और क्यों है ये इतना जरूरी?

SIR Electoral Roll in Bihar Election: चुनाव आयोग (ECI) ने बिहार की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) इलेक्टोरल रोल का फाइनल ड्राफ्ट जारी कर दिया है। यह भारत में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन की एक अनोखी प्रक्रिया है। इसका मकसद चुनाव में धोखाधड़ी रोकना और वोटर लिस्ट को पूरी तरह सटीक बनाना है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार वोटरों की संख्या में 6% की गिरावट आई है। जानिए पूरी डिटेल्स।

आखिर क्या है बिहार SIR इलेक्टोरल रोल?

चुनाव आयोग ने बिहार राज्य की वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम पूरा कर लिया है। इस फैसले के पीछे जो विवाद था, उसकी गूंज मानसून सत्र के दौरान संसद में भी सुनाई दे रही है।

SIR का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि “कोई भी पात्र नागरिक लिस्ट से छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति इसमें शामिल न हो।” नोटिफिकेशन के मुताबिक, दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही नई वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

ताज़ा आंकड़े (28 अक्टूबर, 2025 तक): बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। फाइनल लिस्ट में वोटरों की संख्या घटकर 7.42 करोड़ रह गई है। इसमें से लगभग 47 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जबकि 21 लाख से ज्यादा नए वोटरों को जोड़ा गया है

चुनाव आयोग का कहना है कि सभी आपत्तियों को सुलझा लिया गया है और हटाए गए नामों की लिस्ट जिलावार दिखाई गई है। हालांकि, सुपौल और किशनगंज जैसे कुछ जिलों में नाम हटाए जाने को लेकर पारदर्शिता का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। राजनीतिक बहस जारी है, लेकिन आयोग ने इसे विधानसभा चुनाव से पहले एक निष्पक्ष और समावेशी कदम बताया है।

क्या होता है SIR इलेक्टोरल रोल?

यह सामान्य वोटर लिस्ट अपडेट से अलग है। इसमें पुराने रोल्स पर निर्भर रहने के बजाय, घर-घर जाकर गणना (Enumeration) की जाती है। कर्मचारी हर घर जाकर एक तय तारीख तक पात्र वोटरों की सूची तैयार करते हैं।

यह तब किया जाता है जब चुनाव आयोग को लगता है कि मौजूदा वोटर लिस्ट में बहुत गड़बड़ी है या उसे पूरी तरह से फिर से बनाने की जरूरत है। ऐसा अक्सर बड़े चुनावों से पहले या परिसीमन (Delimitation) जैसी प्रक्रियाओं के बाद किया जाता है।

पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में क्या है SIR का हाल?

पश्चिम बंगाल में SIR का मतलब भी वही है—वोटर लिस्ट की बहुत बारीकी से जांच। बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) हर घर जाकर डीटेल्स अपडेट करते हैं, पात्र लोगों की पहचान करते हैं और डुप्लीकेट, शिफ्ट हो चुके या दिवंगत लोगों के नाम हटाते हैं।

पश्चिम बंगाल और 12 राज्यों का अपडेट: 2026 की SIR प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।

  • कट-ऑफ डेट: 27 अक्टूबर, 2025 (इस तारीख तक की स्थिति देखी जाएगी)।

  • ड्राफ्ट पब्लिकेशन: 9 दिसंबर, 2025 को ड्राफ्ट रोल आएगा।

  • दावा और आपत्ति: 8 जनवरी, 2026 तक लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  • फाइनल रोल: 7 फरवरी, 2026 को जारी होगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए मोबाइल नंबर को वोटर आईडी (EPIC) से लिंक करना अनिवार्य है।

बिहार SIR इलेक्टोरल रोल: लेटेस्ट अपडेट्स और टाइमलाइन

बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए चल रही प्रक्रिया की बड़ी बातें यहाँ जानें:

  • 28 अक्टूबर, 2025: बिहार में पहले चरण के बाद, 30 सितंबर 2025 को फाइनल रोल जारी हुआ। कुल वोटर 7.42 करोड़ हैं, जो पहले से 47 लाख कम हैं।

    • आयोग ने साफ किया कि पहले ड्राफ्ट में 65 लाख नाम कटे थे, लेकिन बाद में 21 लाख नए वोटर जुड़े और प्रोसेस के दौरान 3.66 लाख और नाम हटाए गए। कुछ नाम (करीब 10,000) बिना स्पष्ट कारण के हटे हैं, जिस पर सुपौल और किशनगंज में सवाल उठे हैं।

  • 24 अगस्त, 2025: ECI ने बताया कि काम योजना के मुताबिक चल रहा है। सिर्फ 60 दिनों में 98.2% वोटरों के दस्तावेज मिल गए।

  • 18 अगस्त, 2025: जिन 65 लाख वोटरों के नाम ड्राफ्ट रोल से कटे थे, उनकी लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई ताकि लोग चेक कर सकें।

  • 11 अगस्त, 2025: सुप्रीम कोर्ट में ECI ने कहा कि कानूनन उसे हटाए गए 65 लाख नामों की अलग लिस्ट प्रकाशित करने या स्पष्टीकरण देने की बाध्यता नहीं है। यह जवाब ADR नामक एनजीओ की याचिका पर दिया गया।

  • 1 अगस्त, 2025: एक महीने की मेहनत के बाद पहला ड्राफ्ट जारी हुआ था, जिससे “दावा और आपत्ति” की प्रक्रिया शुरू हुई।

यह खबरों में क्यों है?

ECI ने घोषणा की कि SIR के पहले चरण में बिहार के 52.3 लाख वोटर अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं मिले। यह कुल वोटरों का 6.62% है। इनमें डुप्लीकेट नाम, शिफ्ट हो चुके लोग और मृत व्यक्ति शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि आधार और राशन कार्ड को भी लिस्ट अपडेट करने के लिए वैध माना जाए। वहीं, ECI के इस नए नियम का भी काफी विरोध हुआ कि 2003 के बाद जुड़े मौजूदा वोटरों को भी अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान का प्रमाण देना होगा।

चुनाव आयोग कैसे अपडेट करता है बिहार की वोटर लिस्ट?

  • घर-घर सर्वे: ट्रेंड BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं।

  • पोलिंग स्टेशन: कोशिश रहती है कि एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से ज्यादा वोटर न हों।

  • ड्राफ्ट पब्लिकेशन: 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट आया।

  • दावा-आपत्ति: 1 अगस्त से 1 सितंबर के बीच लोगों ने शिकायतें दर्ज कराईं।

  • निपटारा: 25 सितंबर तक सभी फॉर्म्स और शिकायतों का फैसला हुआ।

  • फाइनल लिस्ट: 30 सितंबर 2025 को फाइनल डेटाबेस अपडेट हुआ।

इतिहास के पन्नों से: 2003 का अपडेट

ECI के मुताबिक, ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। 1952 से लेकर 2004 तक कई बार ऐसे गहन रिविज़न (SIR) हो चुके हैं। बिहार में पिछला SIR 2003 में हुआ था। उस समय बिना आधुनिक तकनीक के 31 दिनों में काम पूरा किया गया था। तब पटना में ही अकेले 70,000 “डुप्लीकेट नाम” मिले थे और कई ऐसे लोगों के नाम हटाए गए थे जिनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट थे।