लखनऊ में NGO से 1.31 करोड़ की ठगी, कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर

लखनऊ में CSR फंड के नाम पर NGO से 1.31 करोड़ की साइबर ठगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक एनजीओ को सीएसआर फंड दिलाने के नाम पर 1.31 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पीड़ित द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। अंततः पीड़ित को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जिसके आदेश पर गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

गोमतीनगर के विशाल खण्ड निवासी बृजेश तिवारी दिशा मानव कल्याण एवं उत्थान समिति के सचिव हैं। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था वर्ष 2010 से हस्तशिल्प, पर्यावरण संरक्षण और समग्र विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही है। सितंबर माह में जौनपुर निवासी अमरीष मिश्रा ने फोन कर संस्था को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड दिलाने का प्रस्ताव दिया।

पीड़ित के अनुसार 14 सितंबर को अमरीष मिश्रा अपने कुछ साथियों के साथ लखनऊ आया। उसने दिल्ली और हरियाणा की कई नामी संस्थाओं को सीएसआर फंड दिलाने से जुड़े दस्तावेज दिखाकर भरोसा दिलाया। इसी दौरान उसने संस्था के बैंक खाते से संबंधित जानकारी हासिल कर ली।

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आरोप है कि ठग 14 से 18 सितंबर तक लखनऊ के विभिन्न होटलों में रुके और इस दौरान एनजीओ के बैंक खाते का दुरुपयोग किया। 15 से 19 सितंबर के बीच खाते में 1.31 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा कराई गई, जिसे बाद में अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर कर लिया गया। 19 सितंबर की रात सभी आरोपी होटल से फरार हो गए। ठगी का शक होने पर 20 सितंबर को पीड़ित ने तत्काल बैंक खाता बंद करवा दिया।

बृजेश तिवारी का आरोप है कि उन्होंने साइबर क्राइम थाना हजरतगंज, गोमतीनगर थाना और पुलिस आयुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दी, लेकिन इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट के आदेश के बाद गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के साथ-साथ साइबर थाना की टीम भी मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विवरण खंगाला जा रहा है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

यह मामला एक बार फिर सीएसआर फंड के नाम पर हो रही साइबर ठगी और पीड़ितों को समय पर न्याय न मिलने की गंभीर समस्या को उजागर करता है।