40 महीने से कैद मासूम Ariha Shah : PM मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने उठाया बेटी का मुद्दा; विदेश मंत्रालय ने बताई ‘अंदर की बात’

Ariha Shah

नई दिल्ली: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत दौरे के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—अरिहा शाह। वो मासूम बच्ची जो पिछले 40 महीनों से जर्मनी में अपने माता-पिता से दूर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में साफ किया कि भारत इस मामले को लेकर कितना गंभीर है। इसके अलावा उन्होंने ईयू-भारत एफटीए (FTA), ईरान के हालात और भारत-जर्मनी सुरक्षा सहयोग पर भी बड़े अपडेट दिए। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और विदेश मंत्रालय ने क्या कहा।

Ariha Shah पर क्या बोला भारत?

Ariha Shah पिछले 40 महीनों से अपने माता-पिता के प्यार से वंचित है और जर्मन सरकार की देखरेख (फोस्टर केयर) में है। विदेश सचिव ने इसे ‘बेहद संवेदनशील’ मामला बताया।

उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर जर्मन सरकार और वहां की एजेंसियों से हमारी लंबी बातचीत चल रही है। एक समय यह कानूनी पचड़ों में फंसा मामला था, लेकिन हमारा साफ मानना है कि अब इसे ‘मानवता’ के नजरिए से सुलझाया जाना चाहिए। हम चाहते हैं कि अरिहा की परवरिश उसके अपने भारतीय माहौल में हो।”

आखिर ये 'फोस्टर केयर' क्या बला है?

आसान भाषा में समझें तो जब प्रशासन को लगता है कि कोई बच्चा अपने घर में सुरक्षित नहीं है, तो उसे अस्थायी रूप से किसी दूसरे परिवार या सरकारी देखरेख में भेज दिया जाता है। इसे ही फोस्टर केयर कहते हैं। इसका मकसद बच्चे की भलाई होता है, लेकिन उम्मीद यही रहती है कि हालात सुधरने पर बच्चा अपने असली परिवार के पास लौट आएगा।

कौन है Ariha और क्या है वो खौफनाक किस्सा?

यह कहानी गुजरात के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर भावेश शाह और उनकी पत्नी धारा की है, जो 2018 में बर्लिन (जर्मनी) शिफ्ट हुए थे। 2021 में उनके घर नन्ही Ariha का जन्म हुआ।

खुशहाल परिवार की जिंदगी में तूफान तब आया जब अरिहा महज 7 महीने की थी। उसके डायपर एरिया में एक मामूली चोट लगी थी। माता-पिता उसे अस्पताल ले गए, लेकिन जर्मन डॉक्टरों ने इसे ‘यौन हमला’ समझ लिया। बस फिर क्या था, जर्मनी के युवा कल्याण कार्यालय (Jugendamt) ने बच्ची को अपनी कस्टडी में ले लिया। माता-पिता को अपनी ही बेटी से मिलने के लिए हफ्ते में सिर्फ दो बार की इजाजत मिलती थी।

माँ-बाप बेगुनाह साबित हुए, फिर भी बेटी नहीं मिली

जांच हुई और जर्मन अधिकारियों को मानना पड़ा कि यौन हमले जैसा कुछ नहीं हुआ था। 2022 में माता-पिता के खिलाफ सारे केस औपचारिक रूप से बंद कर दिए गए। उन पर सिर्फ लापरवाही का आरोप लगा।

बावजूद इसके, Ariha को घर नहीं भेजा गया। जर्मन चाइल्ड एजेंसी ने Ariha  की कस्टडी अपने पास रखने के लिए केस कर दिया। भारत सरकार लगातार यह दबाव बना रही है कि बच्ची का अपने भाषाई, धार्मिक और सामाजिक माहौल में रहना उसके विकास के लिए जरूरी है।

यूरोप से व्यापार और अमेरिकी टैरिफ का डर?

Ariha के अलावा, विदेश सचिव ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया के बाजार दबाव में हैं, इसलिए इस समझौते को जल्द पूरा करना जरूरी है। काफी प्रगति हुई है और यह भारत के बाजार को बड़ा करने की कोशिश है। अमेरिका के साथ भी बातचीत जारी है।

ईरान में फंसे भारतीयों पर क्या अपडेट है?

ईरान और ग्रीनलैंड के हालात पर विदेश सचिव ने कहा कि वो नेताओं की पूरी बातचीत तो शेयर नहीं कर सकते, लेकिन भारत की नजर ईरान पर बनी हुई है।

राहत की बात यह है कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिक और छात्र सुरक्षित हैं। दूतावास उनके संपर्क में है। हालांकि, सरकार ने सलाह दी है कि भारतीय नागरिक संघर्ष वाले इलाकों में जाने से बचें और अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें।

रूस और हथियार: भारत ने दिखाई अपनी ताकत

जब यह पूछा गया कि क्या जर्मनी के साथ दोस्ती बढ़ने से भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी? तो मिस्री ने दो-टूक जवाब दिया।

उन्होंने साफ किया, “भारत हथियार कहां से खरीदेगा, यह हमारी ‘राष्ट्रीय जरूरतों’ पर निर्भर करता है, किसी विचारधारा पर नहीं। हम वहीं से सामान लेंगे जहां से हमें सबसे ज्यादा फायदा और सुविधा होगी।”