लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अगर आप अपने बच्चे का एडमिशन ‘राइट टू एजुकेशन’ (RTE) के तहत प्राइवेट School में कराना चाहते हैं, तो अब आपको दस्तावेजों के झमेले से नहीं जूझना पड़ेगा। सरकार ने नई गाइडलाइन्स जारी करते हुए एडमिशन प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब एडमिशन के लिए बच्चे का आधार नंबर (Aadhaar Number) देना अनिवार्य नहीं होगा।
आधार नहीं, तो भी नहीं रुकेगी पढ़ाई बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चे अब बिना आधार कार्ड के भी RTE कोटे के तहत एडमिशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि कोई भी बच्चा सिर्फ एक आईडी प्रूफ न होने की वजह से शिक्षा के अपने मौलिक अधिकार से वंचित न रह जाए।
RTE एक्ट के तहत Private School में एंट्री लेवल क्लास की 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में देखा गया था कि आधार कार्ड की अनिवार्यता के कारण प्रवासी मजदूरों और गरीब परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “हमारा मकसद एडमिशन प्रोसेस को सरल, पारदर्शी और बच्चों के अनुकूल बनाना है। अब किसी भी बच्चे को आधार या ऐसे किसी दस्तावेज की कमी की वजह से नहीं लौटाया जाएगा जिसे बनवाना माता-पिता के लिए मुश्किल हो।”
उम्र को लेकर कन्फ्यूजन हुआ दूर
नई गाइडलाइन्स में बच्चों की उम्र को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है:
नर्सरी/प्री-प्राइमरी: बच्चे की उम्र 3 से 4 साल के बीच होनी चाहिए।
कक्षा 1: एडमिशन के लिए कम से कम 6 साल की उम्र होना जरूरी है।
उम्र की गणना शिक्षा विभाग द्वारा तय की गई कट-ऑफ तारीख के हिसाब से होगी। इससे School और पैरेंट्स के बीच उम्र को लेकर होने वाला विवाद खत्म हो जाएगा।
दो चरणों में होगी लॉटरी, पारदर्शिता रहेगी बरकरार
सीटों के बंटवारे में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए सरकार ने ‘दो चरणों वाली लॉटरी प्रक्रिया’ (Two-stage lottery system) को बरकरार रखा है:
पहला चरण: सबसे पहले बच्चे के घर के पास वाले (पड़ोस के) School में सीट दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि छोटे बच्चों को स्कूल जाने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े।
दूसरा चरण: अगर पहले राउंड के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं, तो दूसरी लॉटरी निकाली जाएगी। इसमें उन बच्चों को मौका मिलेगा जिन्हें पहले राउंड में सीट नहीं मिली थी, और उन्हें थोड़ी दूर के स्कूलों में भी एडमिशन मिल सकेगा।
School नहीं कर पाएंगे मनमानी
भले ही बच्चे का आधार जरूरी नहीं है, लेकिन माता-पिता को अपनी पात्रता साबित करने के लिए आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र जैसे बेसिक दस्तावेज देने होंगे। School को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन के नाम पर अभिभावकों को परेशान न करें और न ही फालतू कागज मांगें। नियमों का उल्लंघन करने वाले School पर RTE एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों ने बताया बड़ा कदम शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों ने इस फैसले का स्वागत किया है। लखनऊ के एक शिक्षा कार्यकर्ता ने कहा, “गरीब परिवारों के लिए आधार कार्ड की शर्त हटाना एक बहुत बड़ा कदम है। इससे School में बच्चों की संख्या बढ़ेगी और कोई भी बच्चा सिस्टम की जटिलताओं की वजह से अनपढ़ नहीं रहेगा।”
सरकार ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन नए नियमों का जोर-शोर से प्रचार करें और फॉर्म भरने में माता-पिता की मदद करें। आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल और हेल्प डेस्क की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।