नई दिल्ली:
देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए मोदी सरकार ने एक और बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ मारा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देश के पहले नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (NIDMS) को लॉन्च किया. इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का ‘अगली पीढ़ी का सुरक्षा कवच’ माना जा रहा है. नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ने इस सिस्टम को खास तौर पर तैयार किया है, ताकि बम धमाकों (IEDs) से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी एक क्लिक पर मिल सके.
आखिर क्या है यह NIDMS?
सरल भाषा में समझें तो NIDMS एक हाई-टेक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म है. इसका काम पूरे देश से IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस) से जुड़े डेटा को इकट्ठा करना और उसका विश्लेषण करना है. अभी तक समस्या यह थी कि बम धमाकों या बरामदगी से जुड़ी जानकारी अलग-अलग राज्यों और एजेंसियों की फाइलों में दबी रह जाती थी, जिससे जांच में देरी होती थी. लेकिन अब NIDMS इस समस्या को खत्म कर देगा.
कैसे काम करेगा यह नया 'डिजिटल कवच'?
यह सिस्टम बेहद स्मार्ट तरीके से काम करेगा. देश के किसी भी कोने में अगर कोई धमाका होता है, कोई बम मिलता है या कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, तो उसकी पूरी जानकारी तुरंत इस सिस्टम पर अपलोड कर दी जाएगी.
इसमें बम किस टाइप का था, कौन सा बारूद इस्तेमाल हुआ, ट्रिगर कैसा था और घटनास्थल पर क्या मिला—ये सारी डिटेल्स शामिल होंगी. सबसे खास बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म सभी राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और सुरक्षा एजेंसियों के लिए खुला रहेगा. यानी अब सभी एजेंसियां एक ही मंच पर डेटा शेयर कर सकेंगी और उसे देख सकेंगी.
जांच में आएगी तेजी, आतंकियों के पैटर्न का चलेगा पता
Read More : Tata Sierra ने फिर मचाया गदर! TVS की इस बाइक के आगे सब फेल, देखें 2026 की बेस्ट गाड़ियों की पूरी लिस्ट
NIDMS का सबसे बड़ा फायदा धमाके के बाद होने वाली जांच (Post-Blast Investigation) में मिलेगा. मान लीजिए किसी राज्य में धमाका हुआ, तो जांच अधिकारी तुरंत सिस्टम चेक कर सकेंगे कि क्या पहले भी कहीं इसी तरह का बम इस्तेमाल हुआ है?
इससे यह समझना आसान हो जाएगा कि आतंकी कौन सी तकनीक अपना रहे हैं और उनका ‘पैटर्न’ क्या है. इससे न केवल जांच की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल भी बेहतर होगा.
डेटा बताएगा आतंकियों का अगला कदम
लॉन्चिंग के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने साफ किया कि NIDMS एक ‘डेटा-ड्रिवन’ अप्रोच पर काम करेगा. यानी, अब हवा में नहीं, बल्कि पक्के आंकड़ों के आधार पर कार्रवाई होगी. इन्वेस्टिगेटर्स इस सिस्टम की मदद से पुराने ट्रेंड्स को ट्रैक कर सकेंगे और भविष्य के खतरों को पहले ही भांप सकेंगे. टेक्नोलॉजी का यह इस्तेमाल किसी भी आतंकी साजिश को नाकाम करने में बड़ी भूमिका निभाएगा.
आतंकवाद के खिलाफ 'गेम चेंजर'
हम सब जानते हैं कि आतंकी अक्सर सुरक्षाबलों और आम जनता को निशाना बनाने के लिए IED का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में NIDMS को भारत की सुरक्षा के लिए एक ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम न केवल आज के खतरों से निपटेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए देश को एक मजबूत ‘डिजिटल ढाल’ देगा. इस नई शुरुआत के साथ भारत ने बता दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अब टेक्नोलॉजी का भी भरपूर इस्तेमाल करेगा.