Bangladesh : जिस देश को Bharat ने बनाया, आज वहां हिंदुओं की जान आफत में क्यों? जानिए 1971 से अब तक की पूरी कहानी

1971 War India Bangladesh and Hindu Minority Safety Issues

नई दिल्ली / ढाका | स्पेशल रिपोर्ट

Bharat और Bangladesh के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि जज्बातों से जुड़े हैं. दक्षिण एशिया के इतिहास में शायद ही कोई दो देश इतने करीब रहे हों. 1971 में Bangladesh को एक अलग देश बनाने के लिए भारत ने न सिर्फ अपनी सेना भेजी, बल्कि पूरी दुनिया के सामने डटकर खड़ा रहा. लेकिन आज हालात बदल रहे हैं. जिस देश की नींव भारत ने रखी, वहां आज हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और हिंसा ने इस ऐतिहासिक दोस्ती पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.

आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों 1971 के उस सुनहरे इतिहास पर आज चिंता के बादल मंडरा रहे हैं? आइए समझते हैं.

1971: जब Bharat बना था Bangladesh की ढाल

इतिहास गवाह है कि 1971 में जब तत्कालीन पूर्वी Pakistan (अब Bangladesh) में पाकिस्तानी सेना ने जुल्म की इंतहा कर दी थी, तब Bharat ही वह देश था जिसने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया.

  • Pakistani सेना का कहर: उस वक्त वहां कत्लेआम और दमन इस कदर बढ़ा कि करीब 1 करोड़ लोग अपनी जान बचाकर शरणार्थी बनकर भारत आ गए.

  • Bharat का बड़ा दिल: Bharat के सीमावर्ती राज्यों पर भारी दबाव पड़ा, फिर भी भारत ने इन शरणार्थियों को खाना, दवा और सिर छिपाने की जगह दी.

  • मुक्ति वाहिनी और जंग: Bharat ने सिर्फ शरण ही नहीं दी, बल्कि ‘मुक्ति वाहिनी’ को ट्रेनिंग दी और अंततः दिसंबर 1971 में युद्ध के मैदान में उतरकर Pakistan को धूल चटा दी.

  • नया सवेरा: 16 दिसंबर 1971 को Pakistani सेना के सरेंडर के साथ Bangladesh इसमें भारत की भूमिका निर्णायक थी.

आज़ादी के बाद: उम्मीदों का दौर

आज़ादी के बाद Bangladesh के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान और Bharat के बीच एक गहरा भरोसा कायम हुआ. Bharat वह पहला देश था जिसने Bangladesh को मान्यता दी. दोनों देशों ने व्यापार, पानी के बंटवारे और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हाथ मिलाया. उम्मीद थी कि जिस आज़ादी की नींव ‘न्याय’ पर रखी गई है, वहां हर धर्म के लोग सुरक्षित रहेंगे.

Bharat Bangladesh

अब क्यों डरे हुए हैं हिंदू?

Bnagladesh में हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक है और पिछले कुछ सालों में वहां से जो खबरें आ रही हैं, वे चिंता बढ़ाने वाली हैं. मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक:

  • धर्मस्थलों पर हमले: आए दिन मंदिरों में तोड़फोड़ और मूर्तियों को खंडित करने की खबरें आती रहती हैं.

  • संपत्ति पर कब्जा: हिंदू परिवारों की जमीन और दुकानों को निशाना बनाया जा रहा है.

  • चुनावी हिंसा: अक्सर चुनाव या किसी राजनीतिक तनाव के वक्त गुस्सा अल्पसंख्यकों पर ही फूटता है.

  • पलायन का दर्द: लगातार डर और असुरक्षा के माहौल के कारण कई हिंदू परिवार भारत की ओर पलायन करने को मजबूर हैं.

जानकारों का मानना है कि भले ही ये घटनाएं पूरे Bangladesh की सोच न हों, लेकिन बार-बार ऐसा होना एक गंभीर बीमारी की ओर इशारा करता है.

क्या कहती है Bangladesh सरकार?

बांग्लादेश सरकार ने कई मौकों पर सफाई दी है. उनका कहना है कि:

“Bangladesh में सभी नागरिकों को बराबर हक मिले हैं. जो भी हिंसा करता है, उस पर कार्रवाई होती है. कई बार इन घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है या ये महज अफवाहें होती हैं.”

सरकार का दावा है कि उन्होंने सुरक्षा बढ़ाई है और गिरफ्तारियां भी की हैं. हालांकि, आलोचकों का मानना है कि जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है और पीड़ितों को अभी भी न्याय का इंतजार है.

Bharat ने क्या रुख अपनाया?

पड़ोसी होने के नाते भारत इस मुद्दे पर बेहद गंभीर है, लेकिन वह अपनी बात कूटनीतिक तरीके से रखता है.

  • Bharat भारत ने कई बार कूटनीतिक मंचों पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है.

  • Bangladesh से अपील की गई है कि वह अपने आंतरिक मामलों में संवेदनशीलता बरते और सुरक्षा सुनिश्चित करे.

  • विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत ‘शांत कूटनीति’ (Quiet Diplomacy) के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है.