Dhurandhar Real Story: 13 की उम्र में पहला मर्डर, मां का कत्ल और कटे सिरों से फुटबॉल... जानिए कौन था असली 'रहमान डकैत'?
आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म में अंडरवर्ल्ड के खूंखार चेहरों को जिस तरह पर्दे पर उतारा गया है, उसने दर्शकों को हिला कर रख दिया है। इनमें सबसे ज्यादा बात हो रही है पाकिस्तानी गैंगस्टर रहमान डकैत की, जिसका किरदार अक्षय खन्ना निभा रहे हैं। बहरीनी ट्रैक FA9LA पर उनकी धमाकेदार एंट्री ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या वाकई कराची का यह अपराधी इतना ही खूंखार था?
फिल्म में रहमान को एक दहशत के पर्याय के रूप में दिखाया गया है, लेकिन उसकी असली कहानी फिल्म से भी ज्यादा रूह कंपा देने वाली है। यह कहानी है बचपन की क्रूरता, टूटे हुए परिवार और ल्यारी (Lyari) गैंग वॉर की गंदी राजनीति की। फिल्म में संजय दत्त का किरदार पुलिस ऑफिसर चौधरी असलम खान से प्रेरित है, जो अपनी निडरता के लिए मशहूर थे।
आइए जानते हैं ‘धुरंधर’ के इस विलेन की असली और खौफनाक कहानी।
अपराध की दुनिया में जन्म: 13 साल की उम्र में पहला खून
असली रहमान डकैत का जन्म 1979 में हुआ था और उसका नाम सरदार अब्दुल रहमान बलोच था। वह कराची के अंडरवर्ल्ड डॉन मोहम्मद डड्डल का बेटा था। एक अपराधी परिवार में पैदा होने के कारण रहमान का सामना बचपन से ही बंदूकों, गैंगवार और सड़क पर होने वाली हिंसा से हुआ।
स्थानीय किस्से बताते हैं कि उसने अपना पहला मर्डर महज 13 साल की उम्र में कर दिया था। यहीं से उसने उस रास्ते पर कदम रखा जिसने अगले दो दशकों तक ल्यारी के अंडरवर्ल्ड को थर्रा कर रख दिया।
मां का कत्ल: जिंदगी का सबसे काला अध्याय
रहमान की जिंदगी का सबसे खौफनाक किस्सा उसकी मां, खदीजा बीबी से जुड़ा है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रहमान को शक था कि उसकी मां का अफेयर इकबाल नाम के शख्स से है—वही इकबाल जिस पर उसके पिता की हत्या का आरोप था।
दावा किया जाता है कि करीब 15 साल की उम्र में रहमान ने अपनी ही मां को तीन गोलियां मारीं, उनका गला रेता और चुपचाप दफना दिया। हालांकि अलग-अलग कहानियों में डीटेल्स थोड़ी अलग हो सकती हैं, लेकिन यह तय है कि इस घटना ने उसे पूरी तरह बदल दिया। पिता की मौत और परिवार के बिखरने के बाद, रहमान ने अपने पिता के नेटवर्क पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया।
ल्यारी का डॉन और कटे सिरों से फुटबॉल
90 के दशक के अंत तक, रहमान गैंगस्टर हाजी लालू के सिंडिकेट में शामिल हो गया था। 2001 में जब हाजी लालू गिरफ्तार हुआ, तो रहमान ने पूरे संगठन की कमान अपने हाथ में ले ली। 2001 से 2009 के बीच रहमान डकैत पाकिस्तान के सबसे खूंखार गैंग लीडर्स में से एक बन गया।
उसके साथ दो और खतरनाक नाम जुड़े थे:
उजैर बलोच: उसका चचेरा भाई और सेकंड-इन-कमांड।
बाबा लाडला: एक खूंखार गुर्गा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जाता था।
एक रोंगटे खड़े कर देने वाला दावा तो यह भी है कि रहमान के आदेश पर बाबा लाडला और उजैर बलोच ने एक बार अपने दुश्मनों के कटे हुए सिरों से फुटबॉल खेली थी। यह किस्सा आज भी ल्यारी के काले इतिहास का सबसे डरावना सच माना जाता है।
'पाकिस्तान का डर्टी हैरी': SP चौधरी असलम
2000 के दशक में ल्यारी जंग का मैदान बन चुका था। गैंगवार में सैकड़ों जानें जा रही थीं। इसी दौरान एंट्री हुई SP चौधरी असलम खान की, जिन्हें “पाकिस्तान का डर्टी हैरी” कहा जाता था। फिल्म ‘धुरंधर’ में संजय दत्त का किरदार—सिगरेट पीता और हाथों में बंदूक थामे—उन्हीं से प्रेरित है।
चौधरी असलम ने गैंग्स और तालिबान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
2009 में: एक पुलिस एनकाउंटर में उन्होंने रहमान डकैत को मार गिराया। हालांकि, कई लोग इसे “फर्जी एनकाउंटर” भी कहते हैं।
2012 में: उन्होंने ऑपरेशन ल्यारी को लीड किया।
असली जिंदगी में भी यह जंग आसान नहीं थी। 9 जनवरी 2014 को एक सुसाइड बॉम्बिंग (आत्मघाती हमले) में चौधरी असलम की मौत हो गई। उनकी मौत के साथ ल्यारी के हिंसक इतिहास का एक दौर खत्म हो गया।
रहमान डकैत की क्राइम कुंडली (Timeline)
1979: कराची में गैंगस्टर मोहम्मद डड्डल के घर जन्म।
शुरुआती किशोरावस्था: पहले मर्डर में नाम आया।
15 साल की उम्र: अपनी मां खदीजा बीबी की हत्या का आरोप।
90 का दशक (अंत): हाजी लालू के गैंग में एंट्री।
2001: हाजी लालू की गिरफ्तारी के बाद गैंग का लीडर बना।
2001-2009: पाकिस्तान का सबसे खूंखार अपराधी बनकर उभरा।
अगस्त 2009: 34 साल की उम्र में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।
आज कैसा है ल्यारी?
रहमान की मौत के बाद उजैर बलोच ने कमान संभाली और हिंसा का दौर कुछ समय तक और चला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2004 से 2013 के बीच गैंगवार में 800 से ज्यादा लोग मारे गए।
हालांकि, आज ल्यारी काफी शांत है। वहां अब गोलियों की आवाज की जगह फुटबॉल का शोर है। 2024 में वहां की एक लोकल टीम ने नेशनल यूथ चैंपियनशिप भी जीती। ‘धुरंधर’ फिल्म ने एक बार फिर उस दौर की यादें ताज़ा कर दी हैं, जब कराची की सड़कों पर सिर्फ और सिर्फ रहमान डकैत का खौफ बोलता था।
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