नई दिल्ली: साल 2025 के जाते-जाते रोजगार के मोर्चे पर एक मिली-जुली खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में देश की बेरोजगारी दर में मामूली इजाफा हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि महिलाओं और ग्रामीण इलाकों में कामकाजी लोगों की संख्या में सुधार देखा गया है। सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट ने देश के लेबर मार्केट की एक नई तस्वीर पेश की है।
शहरों में बढ़ी टेंशन, गांवों में स्थिति स्थिर
ताजा आंकड़ों (PLFS) के मुताबिक, 15 साल से ऊपर के लोगों में बेरोजगारी दर दिसंबर में 4.8% पर पहुंच गई, जो नवंबर में 4.7% थी।
शहरी इलाकों में झटका: शहरों में बेरोजगारी दर 6.5% से बढ़कर 6.7% हो गई है। जानकारों का कहना है कि त्योहारों का सीजन खत्म होने के बाद शहरों में अस्थायी नौकरियां कम हुई हैं, जिसका असर इन आंकड़ों पर दिख रहा है।
ग्रामीण भारत: गांवों में बेरोजगारी दर 3.9% पर टिकी हुई है, जो एक राहत भरी खबर है।
महिलाओं के लिए अच्छी खबर!
आंकड़ों के बीच एक सुखद पहलू भी है। शहरी महिलाओं के लिए बेरोजगारी दर में गिरावट आई है—यह 9.3% से घटकर 9.1% रह गई है। वहीं, ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.1% के निचले स्तर पर बनी हुई है।
काम करने वालों की संख्या में सुधार (WPR)
सरकार यह भी देखती है कि कुल आबादी में से कितने प्रतिशत लोग वास्तव में काम कर रहे हैं (WPR)।
गांवों में बढ़त: ग्रामीण पुरुषों में काम करने वालों का अनुपात बढ़कर 76% हो गया है।
शहरों में गिरावट: शहरी पुरुषों में यह आंकड़ा थोड़ा गिरकर 70.4% रह गया।
महिलाओं की भागीदारी: ग्रामीण महिलाओं में काम करने का जज्बा बढ़ा है और यह आंकड़ा 38.6% तक पहुंच गया है। कुल मिलाकर, देश की 53.4% आबादी वर्तमान में कामकाजी है।
क्या लेबर मार्केट में लौट रही है रौनक?
एक और जरूरी पैमाना ‘श्रम बल भागीदारी दर’ (LFPR) है, यानी कितने लोग काम करने के इच्छुक हैं। दिसंबर में यह बढ़कर 56.1% हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है: महिलाओं का ‘सेल्फ हेल्प ग्रुप्स’ (SHG) से जुड़ना और खेती-बाड़ी के अलावा अन्य कामों में हाथ बंटाना एक बड़ा सकारात्मक बदलाव है। महिलाओं की भागीदारी अब बढ़कर 35.3% हो गई है।
कैसे जुटाए गए ये आंकड़े?
दिसंबर 2025 की यह रिपोर्ट करीब 3.73 लाख लोगों के सर्वे पर आधारित है। सरकार ने जनवरी 2025 से सर्वे के तरीके में बदलाव किया है ताकि हर महीने की सटीक जानकारी मिल सके। यह इस सीरीज की नौवीं रिपोर्ट है।
निष्कर्ष: दिसंबर के आंकड़े बताते हैं कि जहां एक तरफ शहरों में बेरोजगारी बढ़ना चिंता का विषय है, वहीं महिलाओं का श्रम बल में बढ़ता योगदान भविष्य के लिए एक उम्मीद जगाता है।