Lucknow: उत्तर प्रदेश, जिसकी पहचान कभी अपराध और माफिया राज से हुआ करती थी, आज कानून-व्यवस्था के मामले में देशभर के लिए एक मॉडल बन गया है। योगी सरकार के शासन में क्राइम रेट को जिस तरह से काबू किया गया है, उसके आंकड़े अब चर्चा का विषय हैं। दावा किया जा रहा है कि यूपी में अन्य राज्यों के मुकाबले अपराध नियंत्रण पर सबसे प्रभावी काम हुआ है।
'जीरो टॉलरेंस' और बुलडोजर का खौफ
2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली, तो उन्होंने सबसे पहले ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू की। माफिया और गैंगस्टर्स के खिलाफ ऐसा अभियान चला कि बड़े-बड़े अपराधियों ने या तो प्रदेश छोड़ दिया या खुद जेल जाने की गुहार लगाने लगे।
बुलडोजर कार्रवाई: अवैध संपत्तियों पर सरकारी बुलडोजर ने अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ दी।
कड़े कानून: गैंगस्टर एक्ट और एनएसए (NSA) जैसे कड़े प्रावधानों के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई।
एनकाउंटर: पुलिस की इस सख्त रणनीति ने अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'मिशन शक्ति'
योगी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा। ‘मिशन शक्ति’ के जरिए जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की कोशिश की गई। एंटी-रोमियो स्क्वॉड, महिला हेल्प डेस्क और 112 इमरजेंसी सेवा को इतना सक्रिय किया गया कि पीड़ितों में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ा। फास्ट ट्रैक कोर्ट की मदद से अपराधियों को जल्द सजा दिलाने का रास्ता भी साफ हुआ।
हाईटेक हुई यूपी पुलिस
सिर्फ सख्ती ही नहीं, बल्कि पुलिसिंग को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया गया।
टेक्नोलॉजी: सीसीटीवी कैमरों का जाल और डिजिटल रिकॉर्ड्स ने निगरानी को आसान बनाया।
भर्ती और ट्रेनिंग: बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई और उन्हें आधुनिक हथियारों व तकनीकों से लैस किया गया।
ऑनलाइन एफआईआर: अब लोगों को शिकायत दर्ज कराने के लिए भटकना नहीं पड़ता।
क्राइम घटा तो आया निवेश
सरकार का कहना है कि बेहतर कानून-व्यवस्था का सीधा फायदा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। जब गुंडाराज खत्म हुआ, तो निवेशकों का भरोसा भी जागा। आज यूपी में एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
विपक्ष और आलोचकों के अपने तर्क
इतने बड़े दावों के बीच विपक्षी दल और कुछ मानवाधिकार संगठन सवाल भी उठा रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि आंकड़ों की रिपोर्टिंग में कमी हो सकती है। वहीं, एनकाउंटर और बुलडोजर की नीति पर भी कानूनी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहती है कि हर कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर ही की गई है।
बदल गई यूपी की छवि
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यूपी जैसे विशाल राज्य में अपराध कम करना कोई मामूली बात नहीं है। आज आम जनता के बीच यह संदेश साफ है—‘अगर अपराध करोगे, तो सलाखों के पीछे होगे।’ योगी सरकार का यह मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि कानून-व्यवस्था का यह सख्त पहरा भविष्य में कितना स्थायी साबित होता है।