केंद्र सरकार के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ड्राफ्ट आयकर नियम, 2026 जारी किए हैं, जिनमें उच्च मूल्य के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और नकद लेन-देन की रिपोर्टिंग को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इन नियमों के तहत बैंक और डाकघर को कुछ बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी Income-tax Department को स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFT) के जरिए देनी होगी।
ये ड्राफ्ट नियम फिलहाल सार्वजनिक सुझावों के लिए खुले हैं और 1 अप्रैल 2026 से लागू होने का प्रस्ताव है।
ड्राफ्ट आयकर नियम 2026 में क्या-क्या रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा?
ड्राफ्ट नियमों में मुख्य रूप से दो तरह के लेन-देन पर ध्यान दिया गया है—
नकद जमा (कैश डिपॉजिट)
उच्च मूल्य के फिक्स्ड/टाइम डिपॉजिट
1) नकद जमा (करंट अकाउंट और टाइम डिपॉजिट को छोड़कर)
यदि कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अपने एक या अधिक खातों में नकद जमा करता है और कुल राशि निम्न सीमा तक पहुंचती है, तो उसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी:
₹10 लाख या उससे अधिक — यदि व्यक्ति के पास PAN है
₹5 लाख या उससे अधिक — यदि व्यक्ति के पास PAN नहीं है
यह नियम सेविंग्स जैसे खातों पर लागू होगा, करंट अकाउंट और टाइम डिपॉजिट पर नहीं।
2) फिक्स्ड डिपॉजिट (टाइम डिपॉजिट) की रिपोर्टिंग
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार:
यदि कोई व्यक्ति एक या अधिक नए फिक्स्ड डिपॉजिट करता है
और उनकी कुल राशि एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक हो जाती है
तो बैंक/डाकघर को इसकी रिपोर्ट देनी होगी
पुराने FD की रिन्यूअल (नवीनीकरण) इस रिपोर्टिंग के दायरे में नहीं आएगी।
FD अकाउंट में नकद जमा करने पर क्या नियम है?
ड्राफ्ट नियमों में यह भी साफ किया गया है कि:
यदि व्यक्ति के पास PAN है, तो ₹10 लाख या उससे अधिक की नकद जमा पर अनिवार्य रिपोर्टिंग नहीं होगी
PAN न होने पर यह सीमा ₹5 लाख होगी
यानी PAN धारकों को यहां कुछ राहत मिलती है।
क्या यह कोई नया नियम है?
नहीं।
आयकर नियम, 1962 में भी लगभग इसी तरह के प्रावधान पहले से मौजूद हैं।
मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार भी रिपोर्टिंग जरूरी है:
₹10 लाख या उससे अधिक के टाइम डिपॉजिट (रिन्यूअल को छोड़कर)
एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख या उससे अधिक की नकद जमा (करंट अकाउंट और टाइम डिपॉजिट को छोड़कर)
ड्राफ्ट आयकर नियम 2026 में मुख्य रूप से इन्हीं नियमों को और स्पष्ट किया गया है, खासकर PAN और नॉन-PAN धारकों के लिए अलग-अलग सीमा तय कर के।
टैक्सपेयर्स के लिए क्यों जरूरी है यह जानना?
सरकार उच्च मूल्य के लेन-देन पर नजर मजबूत कर रही है
PAN कार्ड होने से रिपोर्टिंग की सीमा बढ़ जाती है
FD रिन्यूअल पर रिपोर्टिंग नहीं होने से लंबे समय के निवेशकों को राहत
आगे क्या होगा?
ड्राफ्ट नियमों पर सार्वजनिक सुझाव लिए जा रहे हैं। सुझावों के बाद इनमें बदलाव संभव है। अंतिम रूप मिलने के बाद ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकते हैं।
निष्कर्ष: यदि आप बड़ी रकम का FD या नकद जमा करने की योजना बना रहे हैं, तो PAN सक्रिय और लिंक रखें, क्योंकि बड़े लेन-देन की रिपोर्टिंग व्यवस्था अब और ज्यादा साफ हो चुकी है।